भिलाईः मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार में किसी अपराधी का पहला एनकाउंटर किया गया है। दुर्ग जिले में पुलिस ने कुख्यात बदमाश अमित जोश को मुठभेड़ में मार गिराया। भिलाई नगर थाना क्षेत्र में जयंती स्टेडियम के सामने पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर अमित जोश को मार गिराया। निगरानीशुदा बदमाश अमित जोश लंबे समय से फरार चल रहा था। अमित जोश के एनकाउंटर के बाद दुर्ग एसपी ने क्राइम सीन इनवेस्टिगेशन के लिए जांच टीम गठित कर दी है। भिलाई नगर सीएसपी सत्य प्रकाश तिवारी के नेतृत्व में एफएसएल और पुलिस की टीम जांच में जुट गई है। जांच की मॉनीटरिंग एएसपी सिटी सुखनंदन राठौर कर रहे हैं।
कौन था अमित जोश ?
अमित जोश के खिलाफ जिले के अलग अलग थानों 35 से अधिक अपराध दर्ज हैं। अमित जोश 14 साल की उम्र से ही अपराध की दुनिया में आ गया था। अमित जोश पर मारपीट, गुंडागर्दी, हत्या, पिस्टल से फायर जैसे गंभीर मामले दर्ज है। जुलाई 2024 में उसने ग्लोब चौक के आगे गोली मारकर तीन लोगों को घायल कर दिया था। इस घटना के बाद से पुलिस विभाग को काफी फजीहत झेलनी पड़ी थी। इसके बाद ताबड़तोड़ कारवाई कर अमित जोश के करीबियों के साथ उसकी मां, जीजा लक्की जॉर्ज और बहन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था लेकिन अमित जोश पुलिस की गिरफ्त से बाहर था।
जवाबी कार्रवाई में अमित जोश ढेर
गोली कांड के बाद से फरार अमित जोश पर पुलिस ने 35 हजार इनाम की घोषणा भी की थी। इस दौरान पुलिस को सूचना मिली की युवकों पर फायर करने वाला फरार आरोपी अमित जोश भिलाई पहुंचा हुआ है। जिसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम उसका पीछा करते हुए जयंती स्टेडियम के पीछे पहुंची। इस दौरान अमित जोश अपने एक साथी के साथ बाइक से जा रहा था, पुलिस ने पकड़ने की कोशिश की लेकिन अपने पास रखे पिस्टल से पुलिस पर फायर किया। जिसके बाद पुलिस ने भी जवाबी फायर किया। पुलिस ने पहले अमित जोश के पैर पर गोली मारी। इसके बाद भी उसने फायरिंग नहीं बंद की तो पुलिस ने उसे ढेर कर दिया।
दुर्ग में अब तक 4 एनकाउंटर
दुर्ग में अमित जोश का एनकाउंटर चौथी घटना है। इससे पहले 2001, 2005 और 2010 में अपराधियों को मुठभेड़ में मारा गया है।
पहला एनकाउंटर: दुर्ग पुलिस ने सबसे पहले वर्ष 2001 में दुर्ग के अंजोरा क्षेत्र में कुख्यात आरोपी सुखविंदर सिंह उर्फ सोक को पुलिस टीम पकड़ने गई थी। इस दौरान जहां आरोपी और पुलिस में मुठभेड़ में मारा गया। कुख्यात आरोपी सुखविंदर सिंह और उसके गुर्गे ने एक कारोबारी का अपहरण किया था। जिसके बाद से पुलिस को सुखविंदर की तलाश थी। दुर्ग जिले का यह पहला एनकाउंटर था।
दूसरा एनकाउंटर: दूसरा एनकाउंटर वर्ष 2005 में भिलाई में हुआ था। बहुचर्चित महादेव महार हत्याकांड में हिस्ट्रशीटर गोविंद विश्वकर्मा भी शामिल था। पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी गोविंद विश्वकर्मा तलपुरी के आसपास है। जिससे घेराबंदी कर पकड़ने की कोशिश की गई, लेकिन गोविंद ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। जिसके बाद पुलिस की जवाबी फायरिंग में गोविंद गोली के शिकार हो गया था।
तीसरा एनकाउंटर: तीसरा एनकाउंटर वर्ष 2010 में जामुल में हुआ था। जहां नार्थ बस्तर माड़ ज्वाइंट डिविजनल कमेटी के सदस्य नागेश और उसकी पत्नी रावघाट एरिया कमेटी के सदस्य ताराबाई कारतूस खरीदने के लिए भिलाई पहुंचे है। इसकी सूचना मिलने पर पुलिस ने दोनो की तलाश शुरू की। तलाशी के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि दोनों जामुल क्षेत्र में हैं। इसके बाद पुलिस उसे पकड़ने जा रही थी, तभी नागेश ने पुलिस पर फायर कर दिया। जिसके बाद पुलिस की जवाबी फायरिंग में नागेश और उसकी पत्नी ताराबाई को गोली लगी, जिससे उसकी मौत हो गई।