रायपुरः भगवान गणेश को प्रथम पूज्य कहा जाता है क्योंकि हर शुभ काम से सबसे पहले गजानन की पूजा की जाती है। श्रीलोक मंगलमय ज्योतिष अनुसंधान संस्थान चित्रकूट धाम मंडल के निदेशक ज्योतिषाचार्य राजेश जी महाराज के अनुसार ज्ञान स्वरूप गणेश जी विघ्नहर्ता हैं। भगवान गणेश बुद्धि के देवता हैं इसलिए हर काम के शुरू होने या किसी भी अनुष्ठान के आरंभ में सबसे पहले उनकी पूजा की जाती है। मंत्र है- वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरुमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।। इस मंत्र का अर्थ है- जिनकी सुंड घुमावदार है, जिनका शरीर विशाल है, जो करोड़ सूर्यों के समान तेजस्वी हैं, वही भगवान मेरे सभी काम बिना बाधा के पूरे करने की कृपा करें।
प्रथम पूज्य होने का वरदान
शिव महापुराण के अनुसार भगवान शिव ने गणेश जी को प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया है। ऐसी कथा है कि एक बार महादेव शिव और गणेशजी के बीच युद्ध हुआ। तब शिवजी ने अपने त्रिशूल से गणेशजी का सिर काट दिया। इसके बाद देवी पार्वती के उपस्थित होने पर वस्तुस्थिति को समझते हुए शिवजी ने गणेशजी के शरीर पर हाथी का सिर जोड़ दिया। इस पर देवी पार्वती ने भगवान शिव से कहा कि इस रूप में मेरे पुत्र की पूजा कौन करेगा? तब शिवजी ने वरदान दिया कि सभी देवी-देवताओं की पूजा और हर मांगलिक काम से पहले गणेश की पूजा की जाएगी। इनके बिना हर पूजा और काम अधूरा माना जाएगा।
एक और पौराणिक कथा के अनुसार एक बार सभी देवताओं में इस बात पर विवाद हुआ कि धरती पर किस देवता की पूजा पहले हो। तब भगवान शिव ने एक प्रतियोगिता आयोजित की और सभी देवगणों को कहा कि जो भी पूरे ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर पहले आएंगे, वही सर्वप्रथम पूजनीय माने जाएंगे। इसके बाद सभी देवता अपने वाहन पर सवार होकर परिक्रमा के लिए निकल पड़े। लेकिन गणेशजी वहीं अपने माता-पिता शिव-पार्वती की सात परिक्रमा पूर्ण कर उनके सम्मुख हाथ जोड़कर खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि - पित्रोश्च पूजनं कृत्वा प्रक्रान्तिं च करोति य:। तस्य वै पृथिवीजन्यफलं भवति निश्चितम्।। अर्थात, वेद और शास्त्रों का वचन है कि जो पुत्र माता-पिता की पूजा करके उनकी प्रदक्षिणा करता है, उसे पृथ्वी की परिक्रमा का फल मिल जाता है। जब समस्त देवता ब्रह्मांड की परिक्रमा करके लौटे तब भगवान शिव ने श्री गणेश को तेज बुद्धिबल के कारण देवताओं में सर्वप्रथम पूज्य होने का स्थान मिल गया।
श्रीलोक मंगलमय ज्योतिष अनुसंधान संस्थान चित्रकूट धाम मंडल के निदेशक ज्योतिषाचार्य राजेश जी महाराज कहते हैं कि सबसे पहले गणेश जी की पूजा करने से नए काम में कोई बाधा नहीं आती और सफलता के रास्ते में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं। गणेश जी को मंगल और समृद्धि का देवता माना जाता है, उनकी पूजा करने से रिद्धि यानी अच्छी किस्मत, धन, श्रेष्ठता और सिद्धि यानी सफलता की प्राप्त होती है।
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